सप्तधातु · अध्याय अवलोकन

From गर्भ उपनिषद् — गर्भ, शरीर और चेतना का जन्म, taught by Acharya T Krishnatrey. This lesson is free to read.

<pre data-block="statement">इस अध्याय में क्या है | खण्ड 2 सप्त-धातु सिद्धान्त के प्राचीनतम रूपों में से एक कहता है : शरीर आहार से चरण दर चरण परिष्कृत किया जाता है। एक ही श्लोक शृंखला का अनुसरण करता है — आहार-सार से रक्त, मांस, मेद, स्नायु, अस्थि, मज्जा, और अन्ततः शुक्र (बीज), सर्वाधिक परिष्कृत ऊतक, जिससे एक नया शरीर आरम्भ होगा।</pre>


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