व्यापक जगत् में गर्भ उपनिषद्

From गर्भ उपनिषद् — गर्भ, शरीर और चेतना का जन्म, taught by Acharya T Krishnatrey. This lesson is free to read.

<pre data-block="table">गर्भ उपनिषद् का विचार | कहाँ जुड़ता है पाँच तत्त्व (पंच-भूत) | समस्त आयुर्वेद और सांख्य सात धातु (ऊतक शृंखला) | आज की आयुर्वेदिक शरीरक्रिया की रीढ़ मास-दर-मास भ्रूणविज्ञान | प्राचीनतम क्रमबद्ध वर्णनों में से एक (हिप्पोक्रेटीज़, अरस्तू के साथ) जीव 7वें मास में प्रवेश करता है | व्यक्तित्व कब आरम्भ होता है, इसका दर्शन शरीर ब्रह्माण्ड का दर्पण (360, 108) | संस्कृतियों में व्याप्त सूक्ष्म-जगत्–वृहद्-जगत् विचार प्रज्ञानं ब्रह्म | औपनिषदिक महावाक्य</pre> <pre data-block="quote">हृदय के लघु आकाश के भीतर द्युलोक और पृथ्वी, अग्नि और वायु, सूर्य और चन्द्र समाहित हैं। — छान्दोग्य उपनिषद् 8.1.3, सूक्ष्म-जगत् रूप में शरीर पर</pre>


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