संगमग्राम के माधव — केरल शाखा के संस्थापक
From माधव की स्फुटचन्द्राप्ति — सत्य चन्द्र और अनन्त श्रेढ़ी, taught by Acharya T Krishnatrey. This lesson is free to read.
लगभग **1400 ई.** में, केरल में नीला नदी के निकट एक ग्राम में, **संगमग्राम के माधव** (लगभग 1340–1425) ने उस परम्परा की नींव रखी जिसे आज **केरल ज्योतिष-गणित शाखा** कहा जाता है। उन्होंने एक संक्षिप्त, कुशल कृति रची — **स्फुटचन्द्राप्ति**, "सत्य चन्द्र की प्राप्ति" — जो दिनभर छोटे अन्तरालों पर चन्द्र की यथार्थ स्थिति गणित करती है। और उन्होंने इससे भी बड़ा कार्य किया : उन्होंने π और ज्या की **अनन्त श्रेढ़ियाँ** खोजीं, न्यूटन और लाइब्नित्स से दो-तीन शताब्दी पूर्व। <pre data-block="quote">"जो इस विधि को केवल सुनकर ही विस्मित नहीं होता — वह अपनी ही अनधिकारिता के कारण इस प्रक्रिया को ग्रहण न करे।" — माधव, स्फुटचन्द्राप्ति 3</pre>