गणित के इतिहासकार क्या पहचानते हैं
From माधव की स्फुटचन्द्राप्ति — सत्य चन्द्र और अनन्त श्रेढ़ी, taught by Acharya T Krishnatrey. This lesson is free to read.
<pre data-block="research">माधव द्वारा स्थापित केरल शाखा को यह श्रेय प्राप्त है कि उसने यूरोप से शताब्दियों पूर्व पाया : π की अनन्त श्रेढ़ी ("ग्रेगरी–लाइब्नित्स" श्रेढ़ी), ज्या और कोज्या की घात-श्रेढ़ियाँ ("न्यूटन" श्रेढ़ी), π-श्रेढ़ी को त्वरित करने वाला अन्त्य-संस्कार, और π ग्यारह दशमलव स्थानों तक। ज्येष्ठदेव की युक्तिभाषा इससे आगे जाकर इन परिणामों की **उपपत्तियाँ** भी देती है। श्रेढ़ियों पर माधव के अपने ग्रन्थ लुप्त हैं; परिणाम इसलिए ज्ञात हैं क्योंकि नीलकण्ठ, शङ्कर वारियर और ज्येष्ठदेव उन्हें नाम लेकर उद्धृत करते हैं। इसके विपरीत उनकी स्फुटचन्द्राप्ति उनके अपने शब्दों में पाण्डुलिपि रूप में उपलब्ध है।</pre>