सप्तमोऽध्यायः · अध्याय-सार

From छान्दोग्य उपनिषद्, taught by Acharya T Krishnatrey. This lesson is free to read.

<pre data-block="statement">इस अध्याय में | ऋषि सनत्कुमार नारद को सिखाते हैं, जिन्होंने प्रत्येक विद्या में निपुणता पाई फिर भी शोक करते हैं। "जो कुछ तुमने सीखा है वह केवल नाम है" से आरम्भ कर, सनत्कुमार उन्हें पग-पग — वाणी, मन, संकल्प, ध्यान आदि होते हुए — भूमा तक, अनन्त तक ले जाते हैं : "अनन्त ही सुख है; अल्प में सुख नहीं।" और जो आत्मा को यह सब देखता है वह स्वराट् (आत्म-सम्राट्) हो जाता है।</pre>


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