अष्टमोऽध्यायः · अध्याय-सार

From छान्दोग्य उपनिषद्, taught by Acharya T Krishnatrey. This lesson is free to read.

<pre data-block="statement">इस अध्याय में | अन्तिम अध्याय भीतर मुड़ता है। दहर-विद्या सिखाती है कि "ब्रह्मपुर" (शरीर) के भीतर हृदय का एक लघु कमल है, और उसमें एक सूक्ष्म आकाश जो समस्त लोकों को धारण किए है — क्योंकि भीतर का आत्मा ब्रह्माण्ड-सा विशाल है। फिर प्रजापति इन्द्र को, दीर्घ शिष्यत्व और चार चरणों में, सच्चा आत्मा सिखाते हैं : पापरहित, अजर और अमर, जो शरीर से ऊपर उठकर परम ज्योति तक पहुँचकर अपने स्वरूप में उत्तम पुरुष रूप में प्रकट होता है।</pre>


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