परम्परा के जीवन में छान्दोग्य

From छान्दोग्य उपनिषद्, taught by Acharya T Krishnatrey. This lesson is free to read.

<pre data-block="research">छान्दोग्य वेदान्त का आधारशिला है। शंकर, रामानुज और मध्व सभी ने इस पर विस्तार से लिखा, और यह ब्रह्म-सूत्रों में लगभग किसी भी अन्य उपनिषद् से अधिक उद्धृत है। इसका "तत्त्वमसि" चार महावाक्यों में से एक है; इसका "सर्वं खल्विदं ब्रह्म" और इसका भूमा-उपदेश सहस्र वर्षों के दर्शन और भक्ति को गढ़ते रहे। इसकी कथाएँ — सत्यनिष्ठ सत्यकाम, अभिमानी श्वेतकेतु, सब जानकर भी शोक करते नारद — समस्त वैदिक वाङ्मय में सर्वप्रिय हैं।</pre>


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