बारह मन्त्र एक उपदेश कैसे बनते हैं

From माण्डूक्य उपनिषद्, taught by Acharya T Krishnatrey. This lesson is free to read.

<pre data-block="timeline"> मन्त्र 1–2 :: ॐ ही सब; "यह आत्मा ब्रह्म है"; आत्मा के चार पाद मन्त्र 3 :: प्रथम पाद — वैश्वानर, जाग्रत् आत्मा (स्थूल जगत्) मन्त्र 4 :: द्वितीय पाद — तैजस, स्वप्न आत्मा (सूक्ष्म जगत्) मन्त्र 5–6 :: तृतीय पाद — प्राज्ञ, सुषुप्ति; सबका अन्तर्यामी ईश्वर मन्त्र 7 :: चौथी — तुरीय : शान्त, शिव, अद्वैत; "वही आत्मा है" मन्त्र 8 :: आत्मा ही अक्षर ॐ; उसकी मात्राएँ अ, उ, म् मन्त्र 9–11 :: अ = जाग्रत्, उ = स्वप्न, म् = सुषुप्ति — ध्यान सहित मन्त्र 12 :: नीरवता (अमात्र) = तुरीय; "ॐ ही आत्मा है"; आत्मा द्वारा आत्मा में प्रवेश </pre>


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