आर्यभटीय — १२१ श्लोकों में एक क्रान्ति
From आर्यभटीय, taught by Acharya T Krishnatrey. This lesson is free to read.
**४९९ ईस्वी** में, मात्र तेईस वर्ष की आयु में, **आर्यभट** ने कुसुमपुर (पाटलिपुत्र) में केवल लगभग **१२१ श्लोकों** का एक ग्रन्थ रचा — जो **चार पादों (भागों)** में विभाजित है — जिसने विज्ञान का इतिहास ही बदल दिया। इन संक्षिप्त संस्कृत पंक्तियों में समाहित हैं **दशमलव स्थानमान पद्धति**, एक अद्वितीय **वर्णात्मक अंक-संकेत**, विश्व की प्रथम **ज्या-सारणी**, **π** का एक यथार्थ मान, **काल तथा ग्रहों** की गणना, और यह क्रान्तिकारी दावा कि **पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है**। <pre data-block="quote">"जैसे चलती हुई नाव में बैठा व्यक्ति तट के अचल वृक्षों को पीछे की ओर जाते हुए देखता है, वैसे ही पृथ्वी पर स्थित व्यक्ति स्थिर तारों को पश्चिम की ओर बढ़ते हुए देखता है।" — आर्यभट, गोलपाद ९</pre>