गीतिकापाद · अध्याय अवलोकन
From आर्यभटीय, taught by Acharya T Krishnatrey. This lesson is free to read.
<pre data-block="statement">इस अध्याय की विषयवस्तु | गीतिकापाद (१३ श्लोक) प्रारम्भिक आधार है। यह उस मंगलाचरण से आरम्भ होता है जो ग्रन्थ की योजना का नाम बताता है (गीतिका १), श्लोक में विशाल संख्याएँ लिखने के लिए आर्यभट का अद्वितीय वर्णात्मक अंक-संकेत देता है (गीतिका २), एक महायुग में ब्रह्माण्डीय काल के महाचक्रों तथा ग्रहों की परिक्रमा-संख्याओं को अंकित करता है, और — सर्वाधिक प्रसिद्ध रूप से — विश्व की प्रथम ज्या (jyā) सारणी को सांकेतिक रूप में देता है। परवर्ती पाद जो कुछ भी गणना करते हैं, वह सब इन्हीं आधारों पर टिका है। इसके कुछ श्लोक उदाहरण के रूप में आगे प्रस्तुत हैं।</pre>