रज्जु एवं कर्णसूत्रम् · अध्याय अवलोकन

From बौधायन शुल्बसूत्र, taught by Acharya T Krishnatrey. This lesson is free to read.

<pre data-block="statement">इस अध्याय में क्या है | केवल एक रज्जु (शुल्ब/रज्जु) और खूँटों से, बौधायन वर्ग, आयत और यथार्थ समकोण बिछाते हैं। यहाँ हम 'पाइथागोरस' प्रमेय का उनका कथन — अक्ष्णया-रज्जु श्लोक (1.48) — उसके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ते हैं। हम पाइथागोरसीय त्रिक (3-4-5, 5-12-13 और अन्य) से भी मिलते हैं, जो निर्माता को तत्काल, यथार्थ समकोण देते हैं।</pre>


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