क्षेत्रपरिणामः एवं अग्निचितिः · अध्याय अवलोकन
From बौधायन शुल्बसूत्र, taught by Acharya T Krishnatrey. This lesson is free to read.
<pre data-block="statement">इस अध्याय में क्या है | वेदी-अनुष्ठानों को निश्चित क्षेत्रफल परन्तु भिन्न आकार की आकृतियाँ चाहिए थीं। यह अध्याय बौधायन के यथार्थ, क्षेत्र-संरक्षी रूपान्तरों को समेटता है — एक वर्ग को आयत में बदलना और कर्ण-प्रमेय से वर्गों को जोड़ना। फिर हम गोलाकार वेदियों के लिए वृत्त के वर्गीकरण से और महान श्येन-आकार श्येन-चिति से मिलते हैं, जिसमें ऐसी आकृति को उसका आकार बनाए रखते हुए बड़ा करना भी सम्मिलित है।</pre>