जीवनकला · अध्याय सारांश
From चाणक्य नीति — व्यावहारिक ज्ञान के श्लोक, taught by Acharya T Krishnatrey. This lesson is free to read.
<pre data-block="statement">इस अध्याय में क्या है | यह अध्याय आत्म-संयम और जीवन जीने की कला को समेटता है। इसके श्लोक कार्य से पहले बार-बार विचारने योग्य छह-प्रश्नों की परिस्थिति-लेखा-परीक्षा स्थापित करते हैं (4.18); सीता, रावण और बलि के माध्यम से चेताते हैं कि अति सद्गुणों तक को नष्ट कर देती है (3.12); दिखाते हैं कि योग्य पात्र तक पहुँचते ही क्या अपनी शक्ति से फैलता है (14.5); घटाओ, जोड़ो, करो और स्मरण करो की चौगुनी दैनिक साधना देते हैं (14.20); संतोष को शांति के अमृत के रूप में सराहते हैं जिस तक धन-लोभ कभी नहीं पहुँच सकता (7.3); और भाग्य तथा प्रयास को साथ रखते हैं — प्रारब्ध मंच सजाता है, पुरुषार्थ उस पर खेलता है (4.1)।</pre>