सूत्रस्थानम् · अध्याय-सार

From चरक संहिता, taught by Acharya T Krishnatrey. This lesson is free to read.

<pre data-block="statement">इस अध्याय में | सूत्रस्थान आयुर्वेद के मूल सिद्धान्त रखता है। यह चरक की अपनी आयुर्वेद-परिभाषा (1.41) और उसके दो उद्देश्य — स्वस्थ की रक्षा, रोगी का उपचार — देता है, कारण-लक्षण-औषध का त्रिसूत्र (1.24), और तीन दोष (वात, पित्त, कफ)। यह जीवन के तीन स्तम्भों — आहार, निद्रा और ब्रह्मचर्य (11.35) — पर समाप्त होता है।</pre>


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