शारीरस्थानम् · अध्याय-सार
From चरक संहिता, taught by Acharya T Krishnatrey. This lesson is free to read.
<pre data-block="statement">इस अध्याय में | शारीरस्थान शरीर और पुरुष का विवेचन करता है। यह भ्रूणविज्ञान और गर्भ की मास-दर-मास वृद्धि, शरीर-मन-आत्मा (पुरुष) के संयोग, और सप्त धातुओं (ऊतकों) — रस से रक्त, मांस, मेद, अस्थि और मज्जा होते हुए शुक्र तक — को समेटता है, जिनसे शरीर क्रमशः निर्मित और पोषित होता है।</pre>