इन्द्रियस्थानम् · अध्याय-सार
From चरक संहिता, taught by Acharya T Krishnatrey. This lesson is free to read.
<pre data-block="statement">इस अध्याय में | इन्द्रियस्थान अरिष्ट-ज्ञान (प्रज्ञापन/prognosis) की कला है। यह वैद्य को रोगी के वर्ण, स्वर, इन्द्रिय, नाड़ी और चेष्टा में दिखने वाले लक्षणों (अरिष्ट) से रोग की गति पढ़ना सिखाता है — यह जानना कि कब कोई रोगी स्वस्थ हो सकता है और, ईमानदारी व करुणा से, कब स्थिति गम्भीर है।</pre>