गोलाध्यायः · अध्याय-सार
From सिद्धान्तशिरोमणि, taught by Acharya T Krishnatrey. This lesson is free to read.
<pre data-block="statement">इस ग्रन्थ में | गोलाध्याय ग्रन्थ 4 है — "गोल"। इसका भुवनकोश ("विश्वरचना") श्लोक-दर-श्लोक तर्क देता है कि पृथ्वी आकाश में निराधार लटकता एक गोल पिण्ड है, कि प्राणी उस पर सब ओर से खड़े हैं, कि "आधारों" की कोई शृंखला आवश्यक नहीं — और, अपने शिखर-श्लोक में, कि पृथ्वी वस्तुओं को अपनी ही आकर्षण-शक्ति (आकृष्टिशक्ति) से थामती है : गुरुत्व, न्यूटन से लगभग पाँच शताब्दी पूर्व। यह गोलीय त्रिकोणमिति, ऋतुएँ, ग्रहण और यन्त्रों का भी विवेचन करता है।</pre>