शारीरस्थान · विच्छेदन द्वारा शारीर-रचना
From सुश्रुत संहिता, taught by Acharya T Krishnatrey. This lesson is free to read.
<pre data-block="statement">शरीर को प्रत्यक्ष सीखना | प्राचीन ग्रन्थों में अद्वितीय रूप से, सुश्रुत शव के विच्छेदन का विधान करते हैं ताकि शल्यचिकित्सक शरीर को सचमुच जाने — अस्थियाँ (वे कंकाल की विस्तार से गणना करते हैं), वाहिकाएँ, सन्धियाँ और अंग। शारीर-रचना का ज्ञान, उनका आग्रह है, शल्यचिकित्सक की आधारशिला है : जिसे न समझा हो उसे नहीं काटना चाहिए।</pre> <pre data-block="key">सुश्रुत की विच्छेदन-विधि — शरीर को बहती धारा में मृदु करके परत-दर-परत परीक्षण करना — एक सच्ची प्रायोगिक भावना दिखाती है : स्वयं देखो, केवल मानो मत। यही परम्परा के हृदय में स्थित वैज्ञानिक स्वभाव है।</pre>