साधनपाद · अध्याय अवलोकन

From पतञ्जलि के योगसूत्र, taught by Acharya T Krishnatrey. This lesson is free to read.

<pre data-block="statement">इस अध्याय में क्या है | द्वितीय पाद (55 सूत्र) अभ्यास है। यह क्रियायोग से आरम्भ होता है — तप, स्वाध्याय, समर्पण (2.1–2) — और दुःख का निदान करता है : अविद्या में मूलबद्ध पाँच क्लेश (2.3–11) और कर्म की क्रियाविधि (2.12–14)। यह सिखाता है कि आने वाला दुःख विवेक (2.26–28) द्वारा रोका जा सकता है (2.16), फिर ग्रन्थ का हृदय खोलता है : योग के आठ अंग (अष्टांग, 2.29) — यम (संयम) और नियम उनके फलों सहित (2.30–45), और आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार के प्रथम बाह्य अभ्यास (2.46–55)। कुछ प्रमुख सूत्र उदाहरण रूप में नीचे हैं।</pre>


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