मञ्जुल और लघुमानस — सत्य चन्द्र की खोज
From मञ्जुल का लघुमानस — कलन का उदय, taught by Acharya T Krishnatrey. This lesson is free to read.
लगभग **932 ई.** में, ज्योतिषी **मञ्जुल** (जिन्हें **मुञ्जाल** भी कहते हैं) ने **लघुमानस** रचा — ग्रह-गणना का एक संक्षिप्त, प्रतिभाशाली करण-ग्रन्थ। एक अत्यन्त व्यावहारिक समस्या हल करते हुए — चन्द्र इस समय ठीक कहाँ है? — मञ्जुल ने भारत में उस तथ्य के आरम्भिकतम ज्ञात कथनों में से एक लिख दिया जो प्रभावतः **ज्या का अवकलज** है : उनका नियम कि चन्द्र का गति-संशोधन (गतिफल) **कोटिज्या (Rcosine) गुणा दैनिक गति** है — अर्थात् **sin w′ − sin w = (w′ − w) · cos w**। एक चन्द्र-संशोधन में कलन का बीज छिपा है। <pre data-block="quote">चन्द्र कभी स्थिर नहीं रहता — अतः उसका सत्य स्थान पाने के लिए उसकी गति ठीक उसी क्षण आँकनी पड़ती है। इसका उत्तर देते हुए मञ्जुल ने सूक्ष्मतम का स्पर्श किया।</pre>