लघुमानस · अध्याय-सार

From मञ्जुल का लघुमानस — कलन का उदय, taught by Acharya T Krishnatrey. This lesson is free to read.

<pre data-block="statement">इस अध्याय में | हम मञ्जुल से उनके अपने शब्दों में मिलते हैं — उनका आरम्भिक श्लोक जो उनका नाम और उद्देश्य बताता है — फिर वह समस्या जो सब कुछ चलाती है : तीव्र, असमान चन्द्र की सत्य (तात्कालिक) गति। हम आर्यभट के ज्या-अन्तर पढ़ते हैं जो कच्ची सामग्री हैं, और फिर मञ्जुल का कीर्ति-श्लोक (लघुमानस III.14) : गति-संशोधन कोटिज्या (Rcosine) गुणा दैनिक गति है — प्रभावतः ज्या का अवकलज।</pre>


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