स्वागत · सत्कर्म का वेद
From कृष्ण यजुर्वेद — तैत्तिरीय संहिता, taught by Acharya T Krishnatrey. This lesson is free to read.
<pre data-block="statement"> 🕉️ चारों वेदों में यजुर्वेद यज्ञ का वेद है — सत्कर्म का वेद। ऋग्वेद स्तुति करता है, सामवेद गाता है, अथर्ववेद आशीर्वाद और चिकित्सा देता है; यजुर्वेद वह वेद है जो कर्म करते समय बोला जाता है। इसके मन्त्र वे शब्द हैं जो पुरोहित के मुख में तब होते हैं जब उसके हाथ चल रहे होते हैं : जब कुश बिछाई जाती है, जब अग्नि प्रज्वलित होती है, जब आहुति डाली जाती है। यजुर्वेद दो महान् धाराओं में आता है। शुक्ल ("श्वेत") मन्त्र और व्याख्या को पृथक् रखता है। कृष्ण ("काला") — हमारा पाठ — उन्हें मिला देता है : मन्त्र और व्याख्या एक ही अखण्ड शरीर में साथ चलते हैं, व्याख्या प्रत्येक सूत्र के पीछे छाया की भाँति। यही मिश्रण "कृष्ण" का अर्थ है; परम्परा इसे मिश्र, "मिला हुआ" कहती है। कृष्ण की प्रमुख उपलब्ध शाखा तैत्तिरीय संहिता है, सात काण्डों में — जो आज भी दक्षिण भारत में गाई जाती है, और जो समस्त सनातन धर्म की दो सर्वाधिक प्रिय क्रियाओं का घर है : श्री रुद्रम् और चमकम्। </pre>