कृष्ण यजुर्वेद — तैत्तिरीय संहिता
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Taught by Acharya T Krishnatrey
Vedic scholar. Founder of VidyāSetu.
Curriculum
परिचय · प्रस्तावना
- स्वागत · सत्कर्म का वेद — free to read (20 min)
- आप क्या सीखेंगे (20 min)
- तैत्तिरीय शान्ति-मन्त्र (20 min)
- कृष्ण और शुक्ल · एक वेद की दो धाराएँ (20 min)
- एक दृष्टि में · पाठ (20 min)
- इस पाठ्यक्रम की यात्रा (20 min)
काण्डम् १ · काण्ड १ — वेद का आरम्भ
- काण्ड १ · अध्याय-सार — free to read (20 min)
- १.१.१ · यजुर्वेद के प्रथम शब्द (20 min)
- १.१.१ · गौओं का आशीर्वाद (20 min)
- १.१.२ · पवित्र कुश (20 min)
- १.१.४ · सवितृ की प्रेरणा में (20 min)
- १.१.९ · कर्म वस्तुतः कौन करता है (20 min)
- विराम · एक वैदिक कर्म कैसे बनता है (20 min)
- १.८.३ · महान् स्वीकारोक्ति (20 min)
- १.८.५ · मन को वापस बुलाना (20 min)
- १.८.५ · यदि हमने लोकों को क्षति पहुँचाई (20 min)
- १.८.६ · "रुद्र एक ही है" (20 min)
- १.८.६ · त्र्यम्बक — महामृत्युञ्जय (20 min)
- १.८.१५ · सर्वत्र बैठा हंस (20 min)
काण्डम् २ · काण्ड २ — कामना की प्रार्थनाएँ
- काण्ड २ · अध्याय-सार — free to read (20 min)
- २.१.११ · संग्राम के मध्य इन्द्र (20 min)
- २.१.११ · प्रत्येक देव अपने गण सहित (20 min)
- २.१.११ · निष्पापता और अबद्धता (20 min)
- २.१.११ · "मेरी यह पुकार सुनो" (20 min)
- २.१.११ · "हमारी आयु मत हरो" (20 min)
- २.२.१२ · हिरण्यपाणि सविता (20 min)
- २.२.१२ · "आज शुभ, कल शुभ" (20 min)
- विराम · संहिता के देवगण (20 min)
- २.३.१४ · गणपति आवाहन (20 min)
- २.३.१४ · अग्नि और सोम, युगल देव (20 min)
- २.३.१४ · रक्षक सोम (20 min)
- २.४.१४ · देवों का चक्षु (20 min)
- २.४.१४ · कुश पर बुलाए विश्वे देवाः (20 min)
- २.५.१२ · दो सम्राट् (20 min)
काण्डम् ३ · काण्ड ३ — सुधार, माधुर्य और ऋण
- काण्ड ३ · अध्याय-सार — free to read (20 min)
- ३.१.८ · गिरी हुई बूँद (20 min)
- ३.१.९ · प्रातःसवन (20 min)
- ३.१.९ · रुद्र का भाग (20 min)
- ३.३.१ · "मुझमें मेधा स्थापित करो" (20 min)
- ३.३.२ · मधुर वाणी का व्रत (20 min)
- ३.३.८ · आयु देने वाला अग्नि (20 min)
- ३.३.८ · ऋण से मुक्त (20 min)
- विराम · वेद में "प्रायश्चित्त" का अर्थ (20 min)
- ३.४.५ · प्रत्येक देव, अपना क्षेत्र (20 min)
- ३.४.१० · वास्तोष्पति (20 min)
- ३.५.६ · वरुण का पाश खोलना (20 min)
काण्डम् ४ · काण्ड ४ — अग्नि-वेदी, रुद्रम्, चमकम्
- काण्ड ४ · अध्याय-सार — free to read (20 min)
- ४.१.१ · सर्वप्रथम, मन को जोड़ो (20 min)
- ४.१.१ · "यज्ञ को प्रेरित करो; हमारा संकल्प शुद्ध करो" (20 min)
- ४.१.५ · आपो हि ष्ठा — जल (20 min)
- श्री रुद्रम् · आप क्या पढ़ने जा रहे हैं (20 min)
- ४.५.१ · रुद्रम् आरम्भ होता है (20 min)
- ४.५.१ · "इनसे हम पर कृपा करो" (20 min)
- ४.५.१ · वह मुख जो पाप नहीं दिखाता (20 min)
- ४.५.५ · नामों की मालिका (20 min)
- ४.५.८ · ★ नमः शिवाय — प्रथम बार (20 min)
- ४.५.१० · हमारे अपनों को क्षति न पहुँचाओ (20 min)
- ४.५.१० · आरोग्यकारी रूप (20 min)
- चमकम् · अब, याचना (20 min)
- ४.७.१ · "और मुझे…" (20 min)
- ४.७.३ · "और मुझे शान्ति, और आनन्द" (20 min)
- ४.७.११ · और संख्याएँ भी (20 min)
काण्डम् ५ · काण्ड ५ — अग्नि-वेदी का निर्माण
- काण्ड ५ · अध्याय-सार — free to read (20 min)
- ५.१.११ · प्रज्वलित अग्नि (20 min)
- ५.४.२ · "ये इष्टकाएँ धेनु हों" (20 min)
- ५.७.२ · वृषभ-इष्टका (20 min)
- ५.७.२ · संवत्सर की प्रतिमा (20 min)
- ५.७.२ · जिस ज्योति से देव ऊपर गए (20 min)
- ५.७.२ · सौ शरदों की शरण (20 min)
- ५.७.२ · वर्षों का चक्र (20 min)
- ५.७.३ · वज्र-इष्टका (20 min)
- ५.७.४ · राष्ट्रभृत् इष्टका (20 min)
- ५.७.६ · त्रिलोक-सूत्र (20 min)
- ५.७.६ · सब जनों में रुच (20 min)
- ५.७.८ · अग्नि अपना ही आत्मा चुनता है (20 min)
- ५.७.९ · अग्नि को स्वयं में लेना (20 min)
- ५.७.२५ · ब्रह्माण्डीय शरीर (20 min)
काण्डम् ६ · काण्ड ६ — सोमयाग की व्याख्या
- काण्ड ६ · अध्याय-सार — free to read (20 min)
- ६.१.१ · "मेरे शरीर की रक्षा कर" (20 min)
- ६.१.२ · एकमात्र पूर्ण श्लोक (20 min)
- ६.१.३ · "मुझे क्षति मत पहुँचा" (20 min)
- ६.१.४ · "जागते रहो, हे अग्नि" (20 min)
- ६.१.४ · अच्छिन्न तन्तु (20 min)
- ६.१.७ · "मैंने सूर्य के चक्षु पर आरोहण किया" (20 min)
- ६.१.७ · "पुनः लौट आओ" (20 min)
- ६.१.८ · खींची गई रेखा (20 min)
- ६.२.२ · "मैं सुत्या तक पहुँचूँ" (20 min)
- ६.२.११ · गड़े हुए वलग को खोदना (20 min)
- ६.३.३ · "हे ओषधे, रक्षा कर; हे स्वधिते, मत मार" (20 min)
- ६.६.३ · "समुद्र में तेरा हृदय है" (20 min)
काण्डम् ७ · काण्ड ७ — संवत्सर एक यज्ञ के रूप में
- काण्ड ७ · अध्याय-सार — free to read (20 min)
- ७.१.११ · कार्य को उठाना (20 min)
- ७.१.११ · ऋत की रशना (20 min)
- ७.१.११ · "जो है उसके लिए तुम्हें, जो नहीं है उसके लिए तुम्हें" (20 min)
- ७.१.१५ · सब कुछ, अर्पित (20 min)
- ७.१.१८ · छन्दों से जुड़ा, ऋतुओं से दीक्षित (20 min)
- ७.१.१८ · ऋत सत्य में, सत्य ऋत में (20 min)
- ७.४.१५ · "मैं और तू" (20 min)
- ७.४.१७ · "वायु सुखपूर्वक बहे" (20 min)
- ७.४.१८ · महान् पहेली — ब्रह्मोद्य (20 min)
- ७.४.१८ · कौन अकेला चलता है? (20 min)
- ७.४.२० · अकेतु के लिए केतु बनाना (20 min)
- ७.४.२१ · प्राणों की मालिका (20 min)
उपसंहार · सार-संकलन एवं पुनरावलोकन
- सातों काण्ड एक दृष्टि में — free to read (20 min)
- यजुर्वेद कर्म के विषय में क्या सिखाता है (20 min)
- शाश्वत ज्ञान, आधुनिक प्रतिध्वनि (20 min)
- मुख्य शब्दावली (20 min)
- सामान्य भ्रान्तियाँ (20 min)
- बारम्बार पूछे जाने वाले प्रश्न (20 min)
- यजुर्वेद को जीना (20 min)
- चिन्तन · करने का वेद (20 min)
- आपने क्या प्राप्त किया (20 min)
- समापन · शान्ति (20 min)