अध्याय १९–२५ · अध्याय-सार

From शुक्ल यजुर्वेद — वाजसनेयि संहिता, taught by Acharya T Krishnatrey. This lesson is free to read.

<pre data-block="statement"> ये सात अध्याय सौत्रामणी (१९–२१) — आरोग्य और पुनर्स्थापन का कर्म, जिसमें सरस्वती और अश्विन प्रमुख हैं — तथा अश्वमेध (२२–२५) धारण करते हैं। पर एक आरम्भिक जिज्ञासु को इनसे जो लेना चाहिए वह कर्मकाण्डीय यन्त्रणा नहीं। वह है वेद के कुछ सर्वाधिक मानवीय और लोक-हितैषी मन्त्रों का समूह : एक सीढ़ी जो व्रत से सत्य तक चढ़ती है (१९.३०); एक ऐसा जगत् जहाँ ज्ञान और शक्ति साथ चलते हैं (२०.२५); प्रत्येक विचार में चमकती सरस्वती (२०.८६); और सर्वोपरि २२.२२ की महान् राष्ट्र-प्रार्थना। यह अध्याय दो पहेली-युगल भी रखता है और अदिति पर समाप्त होता है, जिनमें जन्मा और अजन्मा सब समाया है। बारह मन्त्र आगे हैं। </pre>


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