शुक्ल यजुर्वेद — वाजसनेयि संहिता
0 learners · 112 lessons · 2240 minutes · ₹250
Taught by Acharya T Krishnatrey
Vedic scholar. Founder of VidyāSetu.
Curriculum
परिचय · प्रस्तावना
- स्वागत · वह वेद जो स्वच्छ रखा गया — free to read (20 min)
- आप क्या सीखेंगे (20 min)
- इस वेद का शान्ति-मन्त्र · VS ३६.९ (20 min)
- शुक्ल और कृष्ण · एक वेद की दो धाराएँ (20 min)
- एक दृष्टि में · पाठ (20 min)
- यह पाठ्यक्रम कैसे चलता है (20 min)
अध्यायाः १–१० · नित्य कर्म
- अध्याय १–१० · अध्याय-सार — free to read (20 min)
- VS १.१ · इस वेद के प्रथम शब्द (20 min)
- VS १.५ · व्रत-ग्रहण — असत्य से सत्य की ओर (20 min)
- VS २.२८ · व्रत-विसर्जन — "जो मैं हूँ वही हूँ" (20 min)
- VS ३.९ · अग्निहोत्र — ज्योति अग्नि है, अग्नि ज्योति (20 min)
- VS ३.६० · त्र्यम्बक — और उसका छिपा दूसरा भाग (20 min)
- विराम · वैदिक कर्म का आकार (20 min)
- VS ४.२६ · सोम का क्रय (20 min)
- VS ५.१४ · वे मन को जोड़ते हैं — योग का मूल (20 min)
- VS ६.२६ · पत्थर सुन रहे हैं (20 min)
- VS ८.५२ · "हम ज्योति को प्राप्त हुए" (20 min)
- VS ९.२३ · "हम राष्ट्र में जागते रहें" (20 min)
- VS ९.४० · राजा का अभिषेक (20 min)
- VS १०.२४ · सर्वत्र बैठा हंस (20 min)
अध्यायाः ११–१८ · अग्नि-वेदी
- अध्याय ११–१८ · अध्याय-सार — free to read (20 min)
- VS ११.१ · सर्वप्रथम, मन को जोड़ो (20 min)
- VS ११.५ · "अमृत के सब पुत्र सुनें" (20 min)
- VS ११.७ · संकल्प शुद्ध करो (20 min)
- VS ११.५७ · उखा, शिशु की भाँति धारण की गई (20 min)
- VS १२.५४ · इष्टका रखने का मन्त्र (20 min)
- विराम · वेदी किसलिए है (20 min)
- VS १३.४ · हिरण्यगर्भ — स्वर्ण-गर्भ (20 min)
- VS १४.११ · इष्टका को अचल करो (20 min)
- VS १५.५४ · "जागो, हे अग्ने" (20 min)
- VS १७.२ · "ये इष्टकाएँ धेनु हों" — और महान् संख्याएँ (20 min)
- VS १७.६७ · पूर्ण वेदी से आरोहण (20 min)
- VS १८.१ · वाज-सूची — शुक्ल चमकम् (20 min)
- VS १८.२९ · "हम अमृत हो गए" (20 min)
अध्यायः १६ · शतरुद्रीय
- अध्याय १६ · अध्याय-सार — free to read (20 min)
- VS १६.१ · सूक्त क्रोध से आरम्भ होता है (20 min)
- VS १६.२ · वह रूप जो पाप नहीं दिखाता (20 min)
- VS १६.३ · "मनुष्य को मत मारो, जगत् को मत मारो" (20 min)
- VS १६.४ · शिव वाणी से सम्बोधन (20 min)
- विराम · श्वेत रुद्रम् और काला रुद्रम् (20 min)
- VS १६.१४ · अस्त्र, भुजाएँ, धनुष (20 min)
- VS १६.१५ · महान् को मत मारो, न लघु को (20 min)
- VS १६.१६ · सन्तान, गौएँ, वीर (20 min)
- VS १६.१७ · नमस्कार-मालिका आरम्भ होती है (20 min)
- VS १६.२८ · भव, रुद्र, शर्व, पशुपति (20 min)
- VS १६.४१ · ★ नमः शिवाय — अपना स्वतन्त्र मन्त्र (20 min)
- VS १६.४७ · अन्न के स्वामी (20 min)
- VS १६.४९ · आरोग्यकारी रूप (20 min)
- VS १६.५१ · अस्त्र रखकर आओ (20 min)
अध्यायाः १९–२५ · कर्म और राष्ट्र
- अध्याय १९–२५ · अध्याय-सार — free to read (20 min)
- VS १९.३० · सीढ़ी — व्रत, दीक्षा, दान, श्रद्धा, सत्य (20 min)
- VS २०.२१ · अन्धकार से ऊपर (20 min)
- VS २०.२५ · जहाँ ज्ञान और शक्ति साथ चलते हैं (20 min)
- VS २०.८६ · सरस्वती प्रत्येक विचार को प्रकाशित करती हैं (20 min)
- VS २२.२२ · ★ राष्ट्र की प्रार्थना (20 min)
- VS २२.३३ · सब कुछ ठीक हो (20 min)
- विराम · अध्याय २३ की पहेलियाँ (20 min)
- VS २३.९–१० · कौन अकेला चलता है? (20 min)
- VS २३.४७–४८ · कौन-सी ज्योति सूर्य के समान है? (20 min)
- VS २३.६५ · "तुझसे अन्य कोई नहीं" (20 min)
- VS २५.१४ · शुभ विचार सब ओर से आएँ (20 min)
- VS २५.२१ · हम मंगलमय सुनें (20 min)
- VS २५.२३ · अदिति ही सब है (20 min)
अध्यायाः २६–३२ · पुरुष और वह एक
- अध्याय २६–३२ · अध्याय-सार — free to read (20 min)
- VS २६.२ · वेद सबसे कहा गया है (20 min)
- VS ३०.३ · दुरित हटाओ, शुभ प्रेरित करो (20 min)
- VS ३१.१ · ★ पुरुषसूक्त का आरम्भ (20 min)
- VS ३१.२ · पुरुष ही यह सब है (20 min)
- VS ३१.३ · एक पाद ही समस्त भूत हैं (20 min)
- VS ३१.७ · यज्ञ से वेद उत्पन्न हुए (20 min)
- VS ३१.१६ · देवों ने यज्ञ से यज्ञ का यजन किया (20 min)
- VS ३१.१८ · ★ "मैं इस महान् पुरुष को जानता हूँ" (20 min)
- VS ३१.१९ · अजन्मा, फिर भी बहुधा जन्मता (20 min)
- VS ३२.१ · ★ "वही अग्नि है" (20 min)
- VS ३२.२ · किसी ने उसे नहीं पकड़ा (20 min)
- VS ३२.३ · ★ "उसकी कोई प्रतिमा नहीं" (20 min)
- VS ३२.८ · ओत और प्रोत बुना हुआ (20 min)
अध्यायाः ३३–३९ · मन, और सौ शरदें
- अध्याय ३३–३९ · अध्याय-सार — free to read (20 min)
- VS ३३.४३ · सविता अन्धकार से होकर चलते हैं (20 min)
- VS ३४.१ · ★ वह मन जो दूर जाता है (20 min)
- VS ३४.२ · वह मन जिससे मनीषी कर्म करते हैं (20 min)
- VS ३४.३ · ज्ञान, चेतना, धृति (20 min)
- VS ३४.४ · भूत, वर्तमान, भविष्य भीतर धारण (20 min)
- VS ३४.५ · वह नाभि जिसमें वेद जड़े हैं (20 min)
- VS ३४.६ · कुशल सारथि (20 min)
- VS ३६.९ · मित्र कल्याणकारी हों (20 min)
- VS ३६.१७ · सब कुछ शान्ति है (20 min)
- VS ३६.१८ · मित्र की दृष्टि (20 min)
- VS ३६.२४ · ★ "हम सौ शरदें देखें" (20 min)
- VS ३७.२ · मन और धी का जुड़ना (20 min)
- VS ३९.४ · वाणी का सत्य मुझे मिले (20 min)
अध्यायः ४० · ईशावास्य
- अध्याय ४० · अध्याय-सार — free to read (20 min)
- शान्ति · पूर्णता (20 min)
- VS ४०.१ · "त्याग से भोगो" (20 min)
- VS ४०.२ · सौ वर्ष कर्म करते हुए (20 min)
- VS ४०.४ · अचल, मन से भी वेगवान् (20 min)
- VS ४०.५ · दूर और निकट (20 min)
- VS ४०.६ · समस्त भूतों को आत्मा में देखना (20 min)
- VS ४०.७ · तब शोक कहाँ? (20 min)
- VS ४०.१५ · सत्य का मुख उघाड़ो (20 min)
- VS ४०.१६ · "वह पुरुष जो वहाँ है — वही मैं हूँ" (20 min)
- VS ४०.१८ · वेद के अन्तिम शब्द (20 min)
उपसंहार · सार-संकलन एवं पुनरावलोकन
- चालीस अध्याय एक दृष्टि में — free to read (20 min)
- श्वेत और काला · तुलना ने क्या सिखाया (20 min)
- शाश्वत ज्ञान, आधुनिक प्रतिध्वनि (20 min)
- मुख्य शब्दावली (20 min)
- सामान्य भ्रान्तियाँ (20 min)
- बारम्बार पूछे जाने वाले प्रश्न (20 min)
- शुक्ल यजुर्वेद को जीना (20 min)
- चिन्तन · यह वेद क्या माँगता है (20 min)
- आपने क्या प्राप्त किया (20 min)
- समापन · शान्ति (20 min)