चालीस अध्याय एक दृष्टि में
From शुक्ल यजुर्वेद — वाजसनेयि संहिता, taught by Acharya T Krishnatrey. This lesson is free to read.
<pre data-block="timeline"> १–१० :: नित्य कर्म — प्रथम शब्द; असत्य से सत्य का व्रत; त्र्यम्बक; राष्ट्र में जागरण ११–१५, १७–१८ :: अग्निचयन — मन जोड़ो, इष्टकाएँ रखो, ज्योति तक चढ़ो, सब ठीक हो १६ :: शतरुद्रीय — रुद्र को सर्वत्र नमस्कार; नमः शिवाय (१६.४१) १९–२५ :: सत्य तक की सीढ़ी; जहाँ ज्ञान और शक्ति साथ चलते हैं; राष्ट्र-प्रार्थना २६–३२ :: पुरुषसूक्त; "मैं इस महान् पुरुष को जानता हूँ"; "उसकी कोई प्रतिमा नहीं" ३३–३९ :: शिवसङ्कल्प सूक्त; सब कुछ शान्ति; हम सौ शरदें देखें ४० :: ईशावास्य — त्याग से भोगो; "वही मैं हूँ"; सुपथ से ले चलो </pre>